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मेरे बचपन का प्यार |मेरा प्यार एक जूनून | A Real Story in Hinidi

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Real Story

मेरा नाम Ranu Singh  मुझे अपनी एक Real Story शेयर कर रहा हु। में जिस कहानी के बारे में बताने जा रहा हु वो मेरी Real Love Story हे उसका नाम Sneha है वो मेरे ही socity में रहती थी उसका मकान मेरे मकान से तोड़ा दूर था लेकिन मेरे बालकनी से उसकी बालकनी दिखती थी। मैंने Sneha को पहली बार अपने 10th की कोचिंग में देखा था। दोस्तों क्या लड़की थी मुझे देखते ही उससे प्यार हो गया । पहले दिन तो मेरी बात नहीं हुई मैंने उसे शाम को balconey पे देखा oh MY GOD में तो बहुत ही ज्यादा खुस हो गया क्या बात है ये तो मेरे सामने वाले मकान में रहती है । में उसको daily balconey से देखता था । एक दिन उसने भी नोटिस किया की उसे कोई देख रहा है ।उसने मुझे देखा लेकिन कोई reaction नहीं था ।

जब मेने देखा की जब उसका कोई रिएक्शन नहीं हुआ में उसे देखता ही रहा । कुछ दिन ऐसे ही चला में उसे देखता वो मुझे देखती लेकिन हमरी कोई बात नहीं होती थी बस हम एक दूसरे को सिर्फ देखते रहते थे । फिर एक दिने मैने उसे इसारे में पूछा की कैसे हो तो उसने भी इसारे में बोली की में ठीक हु में बहुत खुस हुआ मैने सोचा की लगता है की मेरा काम बन जायेगा ।धीरे धीरे हमारी इसारे में बाते स्टार्ट हो गयी लेकिन जब हम रस्ते में मिलते थे तो हम बात नहीं कर पाते थे । में थोड़ा सर्माता था में नहीं बोल पाता था और Sneha भी नहीं बोलती थी दोस्तों हम जब भी कभी अचानक से कहि टकरा जाते थे तब में सोचता था की Sneha कुछ बोलेगी और Sneha सोचती थी की में बोलूंगा इसी चककर में ना Sneha कुछ बोल पति थी और न ही में ।लेकिन balcony पर हम इसारे में बात कर लेते थे । में जा भी उसे इसारे में बोलता था की तुम आज काफी ज्यादा खूबसूरत लग रही हो तब वो मुस्करा देती थी दोस्तों उसकी जो मुस्कुराहट थी न वही मुझे घायल कर देती थी |

Real Story

ऐसा ही २ साल चला हम सर इसारे में ही बाते करते था कभी हम मिल के नहीं कर पाए थे। Reason ये था की हम एक सोसिटी में रहते थे और अगर कोई देख लेगा तो हमरे घर पे जाके बता देगा। दोसत मेरा फाइनेंसियल condition ठीक नहीं था तो इसलिए में जॉब करने की सोची मेरे sociaty मै एक टेलीफोन बूथ था झा पे एक लड़के की requirment थी तो मैने सोचा की क्यो न मै ही कर लू । और मै वह पे जॉब करने लगा दोस्तों लेकिन एक बात थी की उसका घर टेलीफोन बूथ से भी दिखता था । हमारा love story यहां पे चलने लगा Sneha पाने बालकनी पे अति थी घंटो देखती रहती थी ऐसे ही चलता रहा फिर दोस्तों मोबाइल का टाइम आ गया अब कोई टेलीफोन बूथ नहीं यूज़ कर रहा था अब मैने सोचा की मै अब क्या करूंगा तब मैने एक स्कूल मै टीचर की जॉब करने लगा। Sneha को जब पाता चला की मै स्कूल मै teaching करता हु तब वो भी टीचिंग करने के लिए उसी स्कूल मै आ गई। actually Sneha बैंकिंग की तैयारी कर रही थी उसने सोचा की इसी बहाने prepration भी हो जायेगा ।finally हमारी बाते स्कूल मै start हो गयी ।धीरे धीरे हमारी love story आगे बढ़ने लगी

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