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Haunted Talab | A Real Ghost Short Story in Hindi

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मेरे पापा घर में बड़े थे ,मेरे दादा जी की खेती थी। चाचा लोगों का पढ़ाई में मन नहीं लगता था, इसलिए वो लोग खेती किया करते थे और मेरे पापा पढ़ लिख कर नौकरी करते थे।
मेरा पूरा परिवार शहर में रहता था और बाकि के लोग गाँव में ही रहते थे। मेरा जन्म शहर में हुआ, गाँव में अक्सर छुट्टियों में जाया करता था । वहां का माहौल और ताज़ी हवा बहुत अच्छी लगती थी। हर बार की तरह इस बार भी हम सब गर्मियों में अपने गाँव गए, लेकिन इस बार हम करीब चार साल के बाद जा रहे थे। जब हम गाँव पहुंचे तो सब कुछ बदल चूका था। नए-नए घर बन गए थे, कई दुकाने खुल गई थीं। अब यहाँ और भी ज्यादा अच्छा लगने लगा था।
एक दिन मैं अकेले घूमते-घूमते गाँव से थोड़ी दूर अपने पुराने तालाब की तरफ चला गया,जैसे है मैं तालाब के पास पहुंचा, तो देखा कि वो तालाब तो बंद कर दिया गया था। मुझे ये देख कर बड़ा आजीब लगा, क्योंकि पहले यहाँ बहुत लोग हुआ करते थे और अब यहाँ कोई भी नहीं दिख रहा था। मैं वापस घर आ गया, और अपने दादा जी से इस बारे में पूछा। दादा जी बोले, “बेटा आज तो तू वहां चला गया, लेकिन अब कभी भी उस तरफ मत जाना, एक दिन उस तालाब में चार बच्चे डूब कर मर गया। इसके बाद से उस तालाब में कुछ आजीब-अजीब सी घटनाएँ होने लगीं। कुछ लोग गायब भी हो गए। इसलिए गाँव के लोगों से उस तालाब को हमेशा के लिए बंद कर दिया।” मुझे दादा जी की बातें थोड़ी अजीब सी लग रही थीं। फिर भी मैंने यकीन कर लिया।
अगले दिन मैं फिर घुमने निकला, आज मेरा मन बिल्कुल भी तालाब की तरफ जाने का नहीं था, पता नहीं मैं वहां कैसे पहुँच गया। जब मैं उस भुतहे तालाब के पास पहुंचा तो देखा एक बच्चा वहां नहा रहा है। सिर्फ वहां एक ब्च्चा ही था, पाता नहीं मुझे क्या हो गया था, मेरा वहां से जाने का मन ही नहीं कर रह था।
मैं कुछ देर वहीं बैठ गया। मेरे देखते ही देखते वो बच्चा तालाब में डूबने लगा, और वो मदद के लिए चिल्ला रहा था, मैं फौरन तालाब में कूद गया और उसे बचाने की कोशिश करने लगा। तभी मैंने देखा की वो बच्चा पानी के उपर चल रहा था, और जोर जोर से हंस रहा था। फिर आचानक से मुझे लगा कि कोई मुझे पानी के अंदर खीच रहा है। और मैं डूब रहा हूँ। मेरे मुहं से आवाज भी नहीं निकल रही थी। मुझे लग रहा था कि आज तो मैं मर ही जाऊंगा। तभी पता नहीं कौन आया और मुझे बचा लिया।

इसके बाद मुझे घर में बहुत डांट पड़ी। इस हादसे के बाद से मैं फिर कभी भी नदी या तालाब के पास भी नहीं गया। और गाँव भी नहीं गया। अब उस तालाब के ऊपर मिटटी डालकर तललब को सूखा दिया गया है। लेकिन आज भी वहां कुछ न कुछ आजीब होता ही रहता है।आज भी लोग तालाब के बस जाने से डरते है।

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